शनिवार, 20 अक्तूबर 2018

तो फिर क्या है ...!!



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बेचैनियां तेरी
कर देती हैं
बेचैन मुझ को
मेरे हमदम ,
बता मुझे
यह मोहब्बत नहीं
तो फिर क्या है.....!!

दर्द बहे आँसुओं या
अल्फ़ाज़ में
शिकायत तेरी
तुझी से
कर देना
उल्फ़त नहीं
तो फिर क्या है,,,,,,,,!!

भूल जाते हैं
सब कुछ
आकर के आग़ोश में
सुकूँ ही सुकूँ
मयस्सर हो जहाँ
वो जन्नत नहीं
तो फिर क्या है,,,,!!

हर बात तेरी
होती है महसूस
जस की तस
अल्फ़ाज़ों के परे मुझको
अपनी यह फ़ितरत नहीं
तो फिर क्या है....!!

घुल के
एक दूजे में
बहे जाते हैं लुटाने
खुशियां
सौगातों  की ये
बरकत नहीं
तो फिर क्या है....!!

हर मोड़ पर
मिल जाते हैं फिर फिर
न हो के जुदा
पूछे ये ख़ुदा से
ये उसकी लिखी
अपनी क़िस्मत नहीं
तो फिर क्या है,,,,,,!!

7 टिप्‍पणियां:

संजय भास्‍कर ने कहा…

बहुत सुंदर रचना.... अंतिम पंक्तियों ने मन मोह लिया...

yashoda Agrawal ने कहा…

तो फिर क्या...
सादर

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "पांच लिंकों का आनन्द में" रविवार 04 नवम्बर 2018 को साझा की गई है......... http://halchalwith5links.blogspot.in/ पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

Onkar ने कहा…

बहुत बढ़िया

Kusum Kothari ने कहा…

वाह बहुत सुन्दर।।

Anita Saini ने कहा…

बहुत ही सुन्दर रचना

Sudha Devrani ने कहा…

वाह!!!
बहुत लाजवाब...