सोमवार, 26 अक्तूबर 2020

बिखरे हों हरसिंगार ज्यूँ ......

 

############

रूहानी राबिते थे

जिस्मानी बंदिशों में

मरासिम वो पुराना था,

अनजान पैरहन में....


ग़म कोई नहीं दिल को

हर नफ़स है नाम उसका

फिर कैसी नमी है ये 

नज़रों के कहन में....


जिस्मों का जुदा होना

मौजूँ ही नहीं अपना

घुटती हैं फिर क्यों रूहें

मा'शर के रेहन में .....


उससे बिछुड़ के मिलना ,

और फिर से बिछुड़ जाना 

बिखरे हों हरसिंगार ज्यूँ 

दिल के सहन में...

~~~~~~~~~~

.

.

मायने- 

राबिते- सम्बन्ध/connection

मरासिम- जानपहचान/bond

पैरहन- पहने हुए कपड़े/cloths

नफ़स-साँस/breath

मौजूँ-विषय/subject

मा'शर -समाज /society

रेहन - बंधक / mortgaged

सहन-आँगन/courtyard

गुरुवार, 1 अक्तूबर 2020

तेरी आँखों पे लब रख दूँ....


***************

हँसी होठों की देखो तो 

कहीं धोखा न खा जाना

ग़मों को अश्क़ बनने में

ज़रा सी देर लगती है ....



उदासी में डुबो ख़ुद को,

क्यूँ बैठी हो यूँ तुम जाना !

ख़ुदा को ख़ुद में ढलने में 

ज़रा सी देर लगती है....


तेरी आँखों पे लब रख दूँ, 

के आबे ग़म को पी जाऊँ

तिश्नगी ए रूह बुझने में, 

ज़रा सी देर लगती है....


समझना खुद को ना तन्हा,

कठिन है राह ये माना

सफ़र में साथ मिलने में 

ज़रा सी देर लगती है....


तपिश मेरी मोहब्बत की 

कभी पहुंचेगी तुम तक भी 

हिमाला को पिघलने में 

ज़रा सी देर लगती है....


है वक़्ती बात ,न भूलो

खुशी हो या ग़मे हिज्रां 

कली से फूल खिलने में 

ज़रा सी देर लगती है ....


-मुदिता

30/09/2020

बुधवार, 30 सितंबर 2020

हास्य निश्छल........


*************

एक सुकोमल छुअन

अनदेखी अनजानी सी

रूह की गहराइयों में

लगती कुछ पहचानी सी 

पिघला रही है वजूद मेरा 

हो गयी सरस तरल मैं....


यह पहचान स्व-सत्व की

आह्लादित मुझको किये है

गिर गए मिथ्या आवरण

जो सच समझ अब तक जिये है

कुंदन करने तपा के निज को

हो गयी पावन अनल मैं....


पुष्प खिल उठा अंतस में

हुआ सु-रंग मेरा अस्तित्व

रौं रौं में सुवास प्रसरित

नहीं किंचित अन्य का कृतित्व 

निःसंग हो पंक प्रत्येक से

हो गयी ब्रह्म कमल मैं....


प्रस्फुटित है हास्य निश्छल

स्वयं से और गात से

पल प्रति पल रहती प्रफुल्लित

बात या बिन बात के

उलझावों से मिली है मुक्ति

हो गयी सहज सरल  मैं....




गुरुवार, 24 सितंबर 2020

अशआर मुबारक......


********

दिल ने जो दिल से ठानी है, वो रार मुबारक

जीते तू ही हर बार ,हमें तो हार मुबारक....


इज़हारे मोहब्बत भी, तक़ाज़ों का सिला है,

वल्लाह ये आशिक़ी की हो ,तक़रार मुबारक ....


साहिल से उठ के चल न सके ,साथ वो मेरे

मौज ए इश्क़ में हमको हो,  मझधार मुबारक..


तुझको संजो लिया है ,लफ़्ज़ों में छुपा कर 

एहसासे मोहब्बत के ये ,अशआर मुबारक....


रूहों की बात करते हैं ,जिस्मों में डूब कर 

झूठी इस नींव पर रचा ,संसार मुबारक.....


मशहूर होना ,थी नहीं ख़्वाहिश कभी मेरी 

रूहानी चैनो सुकूँ का हो ,मेयार मुबारक .....


दरिया में सफ़ीना है , मल्लाह मेरा मौला

माँझी के हाथ जीस्त की, पतवार मुबारक....

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

इंतहाई मोहब्बत


***************


क्या करते !!! 

ना जो तुझपे 

ऐतबार करते ,

इन्तेहाई मोहब्बत का

और कैसे 

फिर इज़हार करते ......

सोमवार, 24 अगस्त 2020

मुट्ठी में रेत....


***********

मुट्ठी से रेत की मानिंद

फिसलते वक़्त में 

तेरे विसाल का 

वो लम्हा

जा गिरा था

रूह की सदफ़ में .....


अब तलक रोशन है

वजूद मेरा 

उस लम्हे के 

गौहर से....!!


सदफ़-सीप

गौहर-मोती

शनिवार, 8 अगस्त 2020

सावन बीतौ जाय सखी री.....

 

**************

सावन बीतौ जाय सखी री 

सजना क्यूँ नाहिं आय सखी री

नैनन बिरहा झिर झिर अंसुवन

सावन सम बरसाय सखी री ......


भीगी धरा अधीर उदासी

मनुआ मोरा भी तो भीगा 

हर आहट मोरा जियरा धरके

पवन दुआर खटकाय सखी री .....


घिरि घिरि बदरा आवै नभ में

उठि आय हूक मोर जो नाचे

पायल चुप,सूना है अंगना

कोयल शोर मचाय सखी री 

सजना क्यूँ नाहिं आय सखी री 

सावन बीतौ जाय सखी री.......