बुधवार, 30 सितंबर 2020

हास्य निश्छल........


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एक सुकोमल छुअन

अनदेखी अनजानी सी

रूह की गहराइयों में

लगती कुछ पहचानी सी 

पिघला रही है वजूद मेरा 

हो गयी सरस तरल मैं....


यह पहचान स्व-सत्व की

आह्लादित मुझको किये है

गिर गए मिथ्या आवरण

जो सच समझ अब तक जिये है

कुंदन करने तपा के निज को

हो गयी पावन अनल मैं....


पुष्प खिल उठा अंतस में

हुआ सु-रंग मेरा अस्तित्व

रौं रौं में सुवास प्रसरित

नहीं किंचित अन्य का कृतित्व 

निःसंग हो पंक प्रत्येक से

हो गयी ब्रह्म कमल मैं....


प्रस्फुटित है हास्य निश्छल

स्वयं से और गात से

पल प्रति पल रहती प्रफुल्लित

बात या बिन बात के

उलझावों से मिली है मुक्ति

हो गयी सहज सरल  मैं....




गुरुवार, 24 सितंबर 2020

अशआर मुबारक......


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दिल ने जो दिल से ठानी है, वो रार मुबारक

जीते तू ही हर बार ,हमें तो हार मुबारक....


इज़हारे मोहब्बत भी, तक़ाज़ों का सिला है,

वल्लाह ये आशिक़ी की हो ,तक़रार मुबारक ....


साहिल से उठ के चल न सके ,साथ वो मेरे

हो मौज ए इश्क़ में हमें,  मझधार मुबारक..


तुझको संजो लिया है ,लफ़्ज़ों में छुपा कर 

एहसासे मोहब्बत के ये ,अशआर मुबारक....


रूहों की बात करते हैं ,जिस्मों में डूब कर 

बुनियाद झूठी पर खड़ा ,संसार मुबारक.....


मशहूर होना ,थी नहीं ख़्वाहिश कभी मेरी 

रूहानी सकूँ चैन का  ,मेयार मुबारक .....


दरिया में सफ़ीना है , मल्लाह मेरा मौला

माँझी के हाथ जीस्त की, पतवार मुबारक....

शुक्रवार, 11 सितंबर 2020

इंतहाई मोहब्बत


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क्या करते !!! 

ना जो तुझपे 

ऐतबार करते ,

इन्तेहाई मोहब्बत का

और कैसे 

फिर इज़हार करते ......