गुरुवार, 22 दिसंबर 2011

मिल कर बन जाते हैं ध्यान -अनुवाद



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अनुशासन
और
विद्रोह
दो पहलू
एक ही सिक्के के,
समरूप तत्व
सदृश सत्व,
करते हैं
महसूस दोनों
एकसार
इश्वरत्व को

उभरते हैं
विभिन्न
प्रकटीकरण ,
साधुवाद
विभिन्न स्थितियों को
किया जाता है जिनका
भिन्न भिन्न
निर्वचन
भिन्न भिन्न
व्यक्तियों द्वारा ..

नहीं होता
तालमेल
दोनों ही के संग ,
पाखंड
औसतपन
और
दोगलेपन का,
उभरते हैं जो
समाज के
पंगु
मापदंडों के
कारण

होते हैं लालायित
दोनों ही
पाने को आलिंगन
अन्तरंग का ,
स्पर्श
बहिरंग का ,
और
अनुभूति
आकार
और तत्व
दोनों की ...

होता है
मिलन
हृदय और
मस्तिष्क का ,
पिघलते हैं
अस्तित्व
और
घुल जाती हैं
आत्माएं ..

विद्रोह और अनुशासन,
प्रत्येक
यदि एकल ,
करते हैं
सामना
कुंठाओं की
विपद का ,
और
होते हैं
जब संग ,
मिलकर दोनों
बन जाते हैं
ध्यान ...
Original write####

Discipline
And
Rebellion
Two sides of
The same coin,
Homogeneous basics
Analogous essence
Feels alike
Towards
Godliness.....

Different
Manifestations
Emerge
Thanks
Different
Situations
Differently interpreted
By different individuals...

Ill goes with both
Hypocrisy
Mediocrity
And
Double talk
Arising from
Lame scales
Of society.......

Craves both for
Caress of Inner
With
Touch of outer,
Feel of
Form and
Spirit as well...


Head and
Heart
Match,
Melt the
Beings,
Merge the
substances...

Rebellion
And
Discipline
Each alone
Runs risk of
Frustration,
Together
They
Become
Meditation....


by- Nazmaa Khan

4 टिप्‍पणियां:

नीरज गोस्वामी ने कहा…

बहुत भावपूर्ण रचना...बधाई

नीरज

vandan gupta ने कहा…

गहन भावो का समावेश्।

Anita ने कहा…

तब तो हमें अनुशासन के साथ साथ थोड़ा सा विद्रोही भी होना चाहिए.. सुंदर अनुवाद !

कुमार संतोष ने कहा…

सुंदर रचना !
और बहुत सुंदर अनुवाद भी !

मेरी नई रचना ख्वाबों में चले आओ