शुक्रवार, 3 फ़रवरी 2012

गुमशुदा इबारत ....




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रहा 
नाकामयाब 
दरिया 
मेरे इश्क का  
मिटाने को 
इबारतें 
जो उकेरी थी 
माज़ी ने 
दिल पर तेरे ...

गुमशुदा सी है 
उन   
गहरी ,
हलकी ,
धुंधली 
इबारतों की भीड़ में,
मासूम सी 
इक इबारत 
जो लिखी थी 
मैंने 
अपने दिल की  
गहरी स्याही से .....

3 टिप्‍पणियां:

संगीता स्वरुप ( गीत ) ने कहा…

गुमशुदा इबारत में भी इबारत ढूंढ ली .. सुन्दर

vandan gupta ने कहा…

उफ़ …………दर्द और लापता इबारत्…।

Unknown ने कहा…

मासूम सी इबारत...वाह!!