शुक्रवार, 24 जून 2011

मीरा दीवानी हो गयी....(तरही गज़ल )

जो सुनी , देखी ना जानी ,वो कहानी हो गयी
तुमसे नज़रें क्या मिलीं,धड़कन रूहानी हो गयी

बात कितनी कह दी हमने ,और उसने सुन भी ली
गुफ़्तगू में दो दिलों की ,बेज़ुबानी हो गयी

भेद क्या है प्यार में ,साकार का ,निराकार का
कृष्ण की चाहत में जब ,मीरा दीवानी हो गयी

रक्स उसकी चाल में , आँखों में पैमाने भरे
देख कर उसको खिजां में गुलफ़िशानी हो गयी

हो जुदा नेमत से तेरी ,'मैं' ही मैं करता रहा
मिट गया वो जिसपे तेरी मेहरबानी हो गयी

7 टिप्‍पणियां:

Unknown ने कहा…

mit gaya voh........meharbaani hogayi


waah waah maqta to kamaal ka hai ji !

poori gazal main gaa chuka hoon...badhiya dhun ban gayi iski..lekin aapko suna nahin sakta kyonki yahan sirf likhne ki hi suvidha hai
kul mila kar baat ye hai ki maza aa gaya

bahut khoob gazal !

zindabaad !

Rakesh Kumar ने कहा…

भेद क्या है प्यार में ,साकार का ,निराकार का
कृष्ण की चाहत में जब ,मीरा दीवानी हो गयी

वाह! बहुत सुन्दर.
मुदिता जी आप मेरे ब्लॉग पर अभी तक भी नहीं आ पायीं हैं.
'सरयू'स्नान के लिए आपका इंतजार है.

सुरेन्द्र सिंह " झंझट " ने कहा…

बढ़िया ग़ज़ल

Anita ने कहा…

हो जुदा नेमत से तेरी ,'मैं' ही मैं करता रहा
मिट गया वो जिसपे तेरी मेहरबानी हो गयी

सचमुच जो मिटने की कला जान गया वह पूरा ही पा गया... बहुत सुंदर गजल और बहुत बहुत बधाई !

अनाम ने कहा…

हो जुदा नेमत से तेरी ,'मैं' ही मैं करता रहा
मिट गया वो जिसपे तेरी मेहरबानी हो गयी

वाह बहुत खूब कहा है ...।

vandan gupta ने कहा…

आपकी पुरानी नयी यादें यहाँ भी हैं .......कल ज़रा गौर फरमाइए
नयी-पुरानी हलचल
http://nayi-purani-halchal.blogspot.com/

Anamikaghatak ने कहा…

वाह बहुत खूब