सोमवार, 6 जून 2011

सुलगन.....


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सुलग रहा था
मन का कोई
भीतरी कोना
जिस कारण ...
उसी कारण से
उपजे
तुम्हारे क्रोध ने
कर दी
मेरे हृदय पर
रिमझिम
फुहारों की वर्षा ...
बरस गया
यह एहसास
मुझ पर भी
कि अकेली नहीं
मैं इस सुलगन में .....

4 टिप्‍पणियां:

vandan gupta ने कहा…

बहुत सुन्दर भावाव्यक्ति।

रश्मि प्रभा... ने कहा…

behtareen

Anita ने कहा…

जब किसी का क्रोध भी फुहार बन जाये तो ही प्रेम सच्चा है .....

नीलांश ने कहा…

bahut accha hai di...

ehsaason ki fuhaar ho to akela nahi hai koi is jagati me...