शुक्रवार, 6 दिसंबर 2019

तुझ बिन जिया उदास.....


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सुबह का सूरज
अंधियारे में
लाये किरणों का उजास
फिर जग जाती
मिलन की तुझसे
गहरी सी इक आस
पल पल राह तके ये नैना
तुझ बिन जिया उदास ....

थम जाए ये दीठ ए साथी!
जब देखूं तोहरी सूरत
पूजा तू ही
मन्त्र  तू ही है
तू मन मंदिर की मूरत
अब तो आ जा
हाथ थाम ले
सुन मेरी अरदास
तुझ बिन जिया उदास.....

मोहन तू छलिया है इतना
राधा को तरसाये
रुक्मन तेरे विरह वियोग में
नयनन नीर बहाए
मीरा गाये प्रेम वेदना
ले ले कर उच्छवास
तुझ बिन जिया उदास......

पल छिन साथ प्रतीत है तेरा
पर तड़पूँ मैं दिन रैन
झलक तेरी दिख जाए दम भर
मिले हिय को चैन
सूख ना पाती भीगी पलकें
क्यूँ तुझ को ना एहसास
तुझ बिन जिया उदास.....

5 टिप्‍पणियां:

yashoda Agrawal ने कहा…

आपकी लिखी रचना "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" आज शनिवार 07 दिसम्बर 2019 को साझा की गई है...... "सांध्य दैनिक मुखरित मौन में" पर आप भी आइएगा....धन्यवाद!

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल रविवार (०८ -१२-२०१९ ) को "मैं वर्तमान की बेटी हूँ "(चर्चा अंक-३५४३) पर भी होगी
चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का
महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी

Kamini Sinha ने कहा…

बहुत सुंदर सृजन ,सादर नमन

Nitish Tiwary ने कहा…

वाह! शानदार प्रस्तुति।

Onkar ने कहा…

बहुत सुंदर