शुक्रवार, 6 सितंबर 2019

निश्चित है मिलन पिया से...


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मिलन की घड़ियाँ छोटी,
होता विरह तो लंबा है...

समा के खुद में साजन,
बिछोह उसका जीना है...

धड़कन गुंजारे पहलू में,
लब चुप ही रहता है...

अश्रुधार बहे नैनन से
फिर भी स्वप्न संजोना है ...

निश्चित है मिलन पिया से,
यह विश्वास ना खोना है...

2 टिप्‍पणियां:

अनीता सैनी ने कहा…

जी नमस्ते,
आपकी इस प्रविष्टि् के लिंक की चर्चा कल शनिवार (07-09-2019) को "रिश्वत है ईमान" (चर्चा अंक- 3451) पर भी होगी।


चर्चा मंच पर पूरी पोस्ट अक्सर नहीं दी जाती है बल्कि आपकी पोस्ट का लिंक या लिंक के साथ पोस्ट का महत्वपूर्ण अंश दिया जाता है।
जिससे कि पाठक उत्सुकता के साथ आपके ब्लॉग पर आपकी पूरी पोस्ट पढ़ने के लिए जाये।
आप भी सादर आमंत्रित है
….
अनीता सैनी

Onkar ने कहा…

सुन्दर रचना