रविवार, 13 नवंबर 2011

ऐसा कुछ है नहीं कि उम्र भर रोया जाये


कितने दिन दिल को ग़मों में यूँ डुबोया जाये 
ऐसा कुछ है नहीं के उम्र भर रोया जाए 

बेसबब अश्क बहा कर , इन्हें  बरबाद ना कर 
मोल इनका है गर ज़ख्मे ग़ैर को धोया जाए 

खुशियाँ बिखरी हैं हर सिम्त  न रह अब गाफ़िल 
होशमंद हो इन्हें लम्हों   में पिरोया जाए 

बेगानी हक़ीक़त सही , हैं ख़्वाब तो अपने 
तेरे शाने पे हो सर ,चैन से सोया जाए 

वक़्त आने पे मिलेगा ,मुकद्दर में लिखा भी 
ज़मीने ख़्वाब पे तदबीर का बीज तो बोया जाए 

21 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

वक़्त आने पे मिलेगा ,मुकद्दर में लिखा भी
ज़मीने ख़्वाब पे तदबीर का बीज तो बोया जाए
laajawab ...sateek ...sarthak...utkrisht shayari......

Rakesh Kumar ने कहा…

बेसबब अश्क बहा कर , इन्हें बरबाद ना कर मोल इनका है गर ज़ख्मे ग़ैर को धोया जाए

मुदिता जी,सुबह सुबह आपकी बेहतरीन शायरी
पढकर मन मुदित हो गया है जी.

हम गैर ही सही पर आस लगाये बैठे हैं कब से
काश! मेरे ब्लॉग पे आपका अवतरण हो,झट से.

Unknown ने कहा…

अच्छी रचना
बहुत सुंदर

रश्मि प्रभा... ने कहा…

वक़्त आने पे मिलेगा ,मुकद्दर में लिखा भी
ज़मीने ख़्वाब पे तदबीर का बीज तो बोया जाए ...
waah

दिगम्बर नासवा ने कहा…

बेगानी हक़ीक़त सही , हैं ख़्वाब तो अपने
तेरे शाने पे हो सर ,चैन से सोया जाए ..

वाह क्या बात है ... सब कुछ भुला के ऐसा हो जाए तो क्या बात है ... लाजवाब गज़ल है ...

vandan gupta ने कहा…

वाह वाह बहुत सुन्दर शायरी।

रजनीश तिवारी ने कहा…

तदबीर का बीज तो बोया जाए ...बहुत अच्छी रचना ।

आनंद ने कहा…

बेगानी हक़ीक़त सही , हैं ख़्वाब तो अपने
तेरे शाने पे हो सर ,चैन से सोया जाए ..
ek ek shabd puri gazal ka ek ek shabd anukarniya
gazal ne rasta dikhaya Mudita ji shukriya.

abhi ने कहा…

बेगानी हक़ीक़त सही , हैं ख़्वाब तो अपने
तेरे शाने पे हो सर ,चैन से सोया जाए


ऐसा कुछ है नहीं के उम्र भर रोया जाए :) :)

नीरज गोस्वामी ने कहा…

अच्छी रचना
नीरज

अनुपमा पाठक ने कहा…

ऐसा कुछ है नहीं के उम्र भर रोया जाए
सच! कितनी सच्ची और आशान्वित करती पंक्ति है यह...

Unknown ने कहा…

मुदिता...अच्छी गज़ल है

Anupama Tripathi ने कहा…

आपकी किसी पोस्ट की चर्चा है ... नयी पुरानी हलचल पर कल शनिवार 19-11-11 को | कृपया पधारें और अपने अमूल्य विचार ज़रूर दें...

सदा ने कहा…

बेहतरीन ।

S.M.HABIB (Sanjay Mishra 'Habib') ने कहा…

वाह! सुन्दर रचना...
सादर बधाई...

Mamta Bajpai ने कहा…

ऐसा कुछ भी नहीं कि उम्र भर रोया जाये ...
बहुत खूबसूरत ..बधाई

अनामिका की सदायें ...... ने कहा…

maja aa gaya apki gazel padh kar. har sher zindgi ko jeene ki seekh deta hai.

laajawab prastuti.

Arvind kumar ने कहा…

behad khoobsurat...achha lga apke blog par aakar...

Rohit Singh ने कहा…

हां लगता तो है कि इतना कुछ नहीं कि उम्र भर रोया जाए...कुछ पल तो खुशियों के लिए भी है...... कर्म करने के लिए भी है...

jitendra ने कहा…

वाह जी वाह मैं तो आपका फैन बन गया

jitendra ने कहा…
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