मंगलवार, 6 जुलाई 2010

निगाहों की आशनाई है

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मेरी नज़र में ,तेरे इश्क की रानाई है
तेरे खयाल ने लब पे  हंसी सजाई है

हुआ करे है तेरे साथ ज़िक्र मेरा भी
बहुत हसीन सनम   इश्क में रुसवाई है

थे तन्हा बज़्म में ,अजनबी चेहरों से घिरे
करार दिल का  तेरी याद ले के आई है 

तलाश आज भी है  फुरसतों के लम्हों की
गवाह जिनकी रही, सूनी पड़ी अमराई है

मेरे वजूद पे अक्स तेरा छा  गया ऐसे
पूछते लोग हैं कि  क्या  तेरी परछाई है

डुबो के खुश हूँ  सफीना तेरी मोहब्बत में
लहर जुनूं की  किनारे पे ले के आई है

धडकनें भी मेरी अब गीत तेरे गाती हैं
हुई जब अपनी निगाहों की आशनाई है

तुम्हारी याद से सोज़ां है मेरे दिल का चिराग
शम्मा है  बुझने को ,परवाना तमाशाई है !!

4 टिप्‍पणियां:

Sunil Kumar ने कहा…

खुबसूरत शेर दिल की गहराई से लिखा गया शुभकामनायें

Deepak Shukla ने कहा…

Hi

Tere shabdon ke jaadu se..
Ghata es nabh pe chhayee hai..
Mahakti si hawa bahti hui mujh tak bhi aayi hai..

Hai jiska naam hi sunkar..
Dhadak uthta hai tera dil..
Usi ke naam pe tumne..
Gazal apni ye gaayi hai..

Nahi kahte bhale hum hain..
Magar mahsoos karte hai..
Ki teri har gazal main bas..
Wohi khushboo samayi hai..

Gazal main jo samaya hai..
Wohi hai teri baaton main..
Raho tum khush sada hardam..
Dua hothon pe aayi hai..

Gazal par hum gazal kahte rahen..
Ta...jindgi yun hi..
Tere ashaar pe 'DEEPAK'..
Gazal apni banayi hai..

Sundar gazal..

Deepak..

Avinash Chandra ने कहा…

behad khubsurat

khaskar aakhiri wala sher :)

अनाम ने कहा…

bahut hi umdaah....