रविवार, 20 मार्च 2011

कान्हा ...खेरो होरी !!!

सभी को होली की अनन्य शुभकामनाएं ...

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रंग उड़े हैं नीले पीले
कोई मन ना भाये
कान्हा तेरी प्रीत निगोड़ी
तन भी रंग रंग जाए

मन मेरा अब हुआ बसन्ती
तन पर उसकी छाया
रंग हुआ गालों का ऐसा
ज्यूँ गुलाल छितराया
देख छवि कान्हा में अपनी
नैनन रंग बरसाए
कान्हा तेरी प्रीत निगोड़ी...

होली का हर रंग है फीका
क्या नीला क्या पीला
सूखा मोरा मन है तुझ बिन
रंग डार करो गीला...
लगूं अंग अब स्याम तिहारे
मन तन सब रंग जाए
कान्हा तेरी प्रीत निगोड़ी...

खिला है फागुन चहुँ दिसा में
सुनो वेदना मोरी
सखियाँ रंगने आयीं लेकिन
चुनरी मेरी कोरी
रंग दो मेरे रोम रोम को
मैं तू,तू मैं हो जाए
कान्हा तेरी प्रीत निगोड़ी
तन भी रंग रंग जाए ..

6 टिप्‍पणियां:

यशवन्त माथुर (Yashwant Raj Bali Mathur) ने कहा…

होली का हर रंग है फीका
क्या नीला क्या पीला
सूखा मोरा मन है तुझ बिन
रंग डार करो गीला...

बेहद खूबसूरत शब्द!

होली की आपको भी सपरिवार हार्दिक शुभकमानाएं!

सादर

रश्मि प्रभा... ने कहा…

होली का हर रंग है फीका
क्या नीला क्या पीला
सूखा मोरा मन है तुझ बिन
रंग डार करो गीला...
लगूं अंग अब स्याम तिहारे
मन तन सब रंग जाए
कान्हा तेरी प्रीत निगोड़ी...
khero kanha hori ... holi ki shubhkamnayen

vandan gupta ने कहा…

आपकी रचनात्मक ,खूबसूरत और भावमयी
प्रस्तुति भी कल के चर्चा मंच का आकर्षण बनी है
कल (21-3-2011) के चर्चा मंच पर अपनी पोस्ट
देखियेगा और अपने विचारों से चर्चामंच पर आकर
अवगत कराइयेगा और हमारा हौसला बढाइयेगा।

http://charchamanch.blogspot.com/

Dorothy ने कहा…

खूबसूरत अभिव्यक्ति. आभार.
सादर,
डोरोथी.

विशाल ने कहा…

खिला है फागुन चहुँ दिसा में
सुनो वेदना मोरी
सखियाँ रंगने आयीं लेकिन
चुनरी मेरी कोरी
रंग दो मेरे रोम रोम को
मैं तू,तू मैं हो जाए
कान्हा तेरी प्रीत निगोड़ी
तन भी रंग रंग जाए ..

बहुत ही सुन्दर अभिव्यक्ति.
केवल कान्हा ही इस कोरी चुनरिया को रंग सकता है.
किसी को अपनी रचना पढने के लिए कहना मैं रचना की तौहीन मानता हूँ.
लेकिन फिर भी मेरी दिली तमन्ना है कि आप मेरे ब्लॉग पर पधारें.
आपका यह फैन सदैव ऋणी रहेगा .
सलाम.

Rakesh Kumar ने कहा…

रंग दो मेरे रोम रोम को
मैं तू,तू मैं हो जाए
कान्हा तेरी प्रीत निगोड़ी
तन भी रंग रंग जाए ..

अति सुंदर द्वैत से अद्वैत की और ले जाती अभिव्यक्ति .विशाल जी (sagebob)से आपके बारे में और आपकी गीता की रूचि के बारे में जाना'.
मेरे ब्लॉग 'मनसा वाचा कर्मणा' पर आपका स्वागत है.