शनिवार, 23 अप्रैल 2011

तुम्हें कोई याद करता है ....

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जुदा तन हों भले जानां
न होंगी पर जुदा रूहें
धडकता दिल ,
हर आती सांस
तुमसे कहती जायेगी -
तुम्हें कोई याद करता है ...!!!

कभी बेसाख्ता
निकलोगे घर से ,
जानिबे मंज़िल ...
तले क़दमों के होंगे
कुछ निशाँ
बीते हुए कल के ..
उसी लम्हे में
सरगोशी सी होगी
तेरे कानों में-
तुम्हें कोई याद करता है ...!!!

भरी महफ़िल में होंगे
मौज के मेले
हजारों ही
डुबो के खुद को
उनमें तुम
भुला बैठोगे
ये दुनिया
परे दुनिया से
होते ही
खबर मिल जायेगी तुमको-
तुम्हें कोई याद करता है ...!!!

किसी पल होगे
तुम तन्हा
खुदी में
खुद की डूबोगे..
अतल गहराइयां
मन की
छुओगे जब अकेले में
उसी क्षण
एक धीमी सी
सदा
हर सिम्त गूंजेगी-
तुम्हें कोई याद करता है ...!!!




9 टिप्‍पणियां:

Anupama Tripathi ने कहा…

किसी पल होगे
तुम तन्हा
खुदी में
खुद की डूबोगे..
अतल गहराइयां
मन की
छुओगे जब अकेले में
उसी क्षण
एक धीमी सी
सदा
हर सिम्त गूंजेगी-
तुम्हें कोई याद करता है ...!!!
बहुत ही सुंदर जज़्बात ...
बहतरीन ख़यालात .....
जितनी तारीफ की जाये कम है ....!!
एक गाना याद आ रहा है ....
.तुम मुझे भूल भी जाओ तो ये हक़ है तुमको
मेरी बात और है ..मैंने तो मुहब्बत की है ....!!!

रश्मि प्रभा... ने कहा…

कभी बेसाख्ता
निकलोगे घर से ,
जानिबे मंज़िल ...
तले क़दमों के होंगे
कुछ निशाँ
बीते हुए कल के ..
उसी लम्हे में
सरगोशी सी होगी
तेरे कानों में-
तुम्हें कोई याद करता है... aur pal bhar ke liye kadam thithak jayenge

vandan gupta ने कहा…

कोई तुम्हे याद करता है……………सारे मनोभाव समेट दिये हैं………॥बेहद उम्दा रचना दिल को छू गयी।

मनोज कुमार ने कहा…

बहुत अच्छी कविता।

Kunwar Kusumesh ने कहा…

बहुत बढ़िया.

udaya veer singh ने कहा…

bodhgamy kavy ,pramudit karta hua .aabhar ji

अजय कुमार ने कहा…

सुंदर अभिव्यक्ति

निवेदिता श्रीवास्तव ने कहा…

अच्छी अभिव्यक्ति.....

Vinesh ने कहा…

हृदयस्पर्शी रचना !