शनिवार, 20 अगस्त 2022

एतबार तो है ....


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निगाह मिले न मिले, इज़हार तो है

लब खुले न खुले , इक़रार तो है....


सजा के बैठे हैं ,दिल के चमन को

गुल खिले न खिले ,इंतज़ार तो है....


समा गयी रूहें ,बिछोह कैसा अब

हिज्र टले न टले , क़रार तो है ....


फुर्सतें कब उलझनों में दुनिया की 

वक़्त मिले न मिले,इख़्तियार तो है....

 

मुक़र्रर संग अपना ,है रज़ा इलाही की

सच खुले न खुले , एतबार तो है....


मुक़र्रर - निश्चित

सुकून


सुकून आ जायेगा जब 

बेचैनियों को मेरी ,

ढूँढा करोगे 

इश्क़ में

मुझसा दीवाना

तुम भी ......

सोमवार, 1 अगस्त 2022

कर्ज़...



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न जाने 

कितने जन्मों का 

उठाये हुए कर्ज़ 

रूह पर अपनी 

चली आती हूँ 

बार बार 

चुकाने उसको 

लेकिन 

चुकता नहीं 

पुराना कर्ज़ 

और करती जाती हूँ 

उधारी ,

ज़िन्दगी  जीते जीते 

भावों के आदान प्रदान में ...


जुड़ जाता है 

क्रोध 

वैमनस्य 

निराशा 

हताशा 

अपेक्षा 

कामना 

वासना

ईर्ष्या

प्रतिस्पर्धा  

अनदेखे 

अनजानों के साथ भी 


बाँध के गठरी 

इतने बोझ की 

जा नहीं सकती 

दुनिया के 

चक्रव्यूह से परे 


हे माँ शक्ति ! 

कर सक्षम मुझको 

हो पाऊं साक्षी 

करने को विसर्जन 

इस गठरी का 

और चुका सकूँ 

कर्ज़ अपना 

हो कर प्रेम 

समस्त 

अस्तित्व में ,

अश्रु पूरित  नैनों से 

है बस यही 

करबद्ध प्रार्थना 

तुझसे ......

सोमवार, 25 जुलाई 2022

अपने आप...


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बरसा आकाश अपने आप

भीगी धरती अपने आप 

ज्यूँ तुम थे बरसे

और मैं थी भीगी ....


बूँद ठहरी अपने आप

सहेजा पात ने अपने आप

ज्यूँ तुम ने सहेजा

 और मैं थी ठहरी ...


चमका सूरज अपने आप 

वाष्पित हुई बूँद अपने आप 

ज्यूँ नियति का खेला

और हम थे बिछड़े ....


फिर बरसेगा बादल

अपने आप 

फिर ठहरेगी बूँद 

अपने आप

होता रहेगा 

मिलन बिछोड़ा 

अपने आप .....

बुधवार, 20 अप्रैल 2022

घड़ी बिरहा की फिर टली है क्या !!!!!

 

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आँख में कुछ छुपी नमी है क्या

कोई ख्वाहिश सी फिर पली है क्या .....


ऊंचा उड़ने से पहले देख तो ले

तेरे कदमों तले ज़मीं है क्या .......


दावा उनका फ़कीर होने का 

दिल में हसरत कोई दबी है क्या......


रिन्द बैठा लिए ख़ाली प्याला

तुझ सी साकी नहीं मिली है क्या......


तेरे आने की मुन्तज़िर हो के 

साँस थम थम के फिर चली है क्या......


भँवरे के छूने से खिली है कली

घड़ी बिरहा की फिर टली है क्या .......


सुबह दस्तक सी दे रही शायद 

रात तेरे बिन कभी ढली है क्या ........


आईना देख कर अना मेरी

चूर अब भी नहीं हुई है क्या.......


महसूस...


थम सी जाती हैं साँसे

दिख जाते हैं जब वो

गुज़रते हुए 

गली से मेरी,

कहीं कर ना लें

महसूस मुझको

छुपा हुआ 

दरीचों के पीछे.....

मंगलवार, 19 अप्रैल 2022

कुछ तू मेरे संग आएगा.....


महफ़िल में अपने आने से इक नया रंग आएगा

तुझमें रह जाऊंगी मैं, कुछ तू मेरे संग आएगा 


लिख दी है हर नफ़स ,मैंने तो अब नाम तेरे

शायद तुझको भी कभी आशिकी का ढंग आएगा