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कर दिए जबसे जज़्बात मिरे,मैंने दफ़न
ज़िक्र मेरा भी सयानों की तरह होता है ...
इल्ज़ाम ए मोहब्बत से बरी है मुजरिम
इश्क़ उसका तो बयानों की तरह होता है ....
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जिस्मों के पहरेदार समझ लेते जो खुद को
रूह कह रही है उनका गुनहगार हो के देख ....
तसव्वुर के आसमां में उड़ानें तो कम नहीं
ज़ुल्फ़ों के पेंचों ख़म में गिरफ़तार हो के देख.....