न वाबस्ता रहा
जिस दर्द से
कभी
दिल ये मेरा ,
वो मेरी नज़्मों के
हर लफ्ज़ में
नज़र आता है.....
हूँ शुक्रगुज़ार तेरी ,
मुझको
भुलाने वाले ,
कि यही दर्द तो
गज़लों में
असर लाता है.....
जिस दर्द से
कभी
दिल ये मेरा ,
वो मेरी नज़्मों के
हर लफ्ज़ में
नज़र आता है.....
हूँ शुक्रगुज़ार तेरी ,
मुझको
भुलाने वाले ,
कि यही दर्द तो
गज़लों में
असर लाता है.....


